रीवा की तर्ज पर मऊगंज में कब जागेगा प्रशासन? पुराना बस स्टैंड और बरहटा रोड पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा, कलेक्टर के आदेशों की हो रही सरेआम अनदेखी

मऊगंज: पड़ोसी जिले रीवा में भू-माफियाओं के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा की गई बड़ी कार्रवाई के बाद अब मऊगंज में भी जनता और स्थानीय पत्रकारों द्वारा यह सवाल उठाया जाने लगा है कि क्या ऐसी ही सख्त कार्रवाई मऊगंज कलेक्टर द्वारा यहां के अतिक्रमणकारियों पर भी की जाएगी? रीवा में धोबिया टंकी के पास अनाथालय की जमीन पर कब्जा कर संचालित हो रहे दो बड़े मैरिज गार्डन्स (उत्सव और विंध्य मैरिज गार्डन) पर बुलडोजर चलाकर करीब 250 करोड़ रुपए की सरकारी भूमि को मुक्त कराया गया है। लेकिन इसके विपरीत, मऊगंज जिले में हालात पूरी तरह से इसके उलट नजर आ रहे हैं।
मऊगंज के पुराना बस स्टैंड के सामने और बरहटा रोड पर प्रशासनिक सुस्ती के कारण अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं। स्थिति यह है कि इस क्षेत्र में हाल ही में जल निकासी के लिए नालियों का निर्माण कराया गया था, लेकिन नाली बनने के महज एक हफ्ते के भीतर ही लोगों ने उसके ऊपर दोबारा से अवैध कब्जा करना शुरू कर दिया। नाली के ऊपर टीन सेट लगाकर और स्थाई रूप से दुकान तान ली गई है। मार्ग के दोनों ओर हो रहे इन अवैध निर्माणों के कारण आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और लोग सड़क पर ही अपनी दुकानें सजाकर बैठ रहे हैं।
हद तो तब हो जाती है जब हाल ही में कलेक्टर संजय कुमार जैन की अध्यक्षता में आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि शहर के आंतरिक यातायात को सुगम बनाने के लिए हर हाल में अतिक्रमण हटाया जाए और अवैध पार्किंग पर अंकुश लगाया जाए। बावजूद इसके, राजस्व विभाग और नगर परिषद के अधिकारी गहरी नींद में सोए हुए हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय स्तर पर कई बार खबरें प्रकाशित की जा चुकी हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों द्वारा कलेक्टर के आदेशों को भी पूरी तरह से अनसुना कर दिया गया है।
एक तरफ शहर के विकास और सुगम यातायात के लिए नए निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते अवैध कब्जों का साम्राज्य फैलता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि रीवा की तर्ज पर मऊगंज प्रशासन कब अपनी नींद से जागता है और जिला प्रशासन के सख्त निर्देशों के बाद इन अतिक्रमणकारियों पर कब बुलडोजर जैसी बड़ी कार्रवाई की जाती है।


