पुणे कचरा डंप हादसा: 84 घंटे बाद खत्म हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन, 9 लोगों की मौत; प्रशासन पर उठे सुरक्षा के सवाल

पुणे | 12 जुलाई 2026
महाराष्ट्र के पुणे जिले के मोशी स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी (Waste-to-Energy) परियोजना में हुआ दर्दनाक हादसा देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। चार दिनों तक चले लगातार बचाव अभियान के बाद रविवार तड़के मलबे से अंतिम लापता कर्मचारी का शव बरामद कर लिया गया। इसके साथ ही हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 9 हो गई और करीब 84 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त कर दिया गया।

कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के अनुसार, 8 जुलाई की दोपहर करीब 1:30 बजे मोशी स्थित पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (PCMC) के वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट में वर्षों से जमा कचरे का विशाल ढेर अचानक खिसक गया। भारी मात्रा में कचरा प्लांट के प्रशासनिक भवन पर आ गिरा, जिससे इमारत का बड़ा हिस्सा भरभराकर ढह गया।
हादसे के समय भवन के भीतर कर्मचारी मौजूद थे। अचानक हुए धंसाव के कारण कई लोग मलबे और कचरे के नीचे दब गए।
कितने लोग थे भवन में?
प्रशासन के अनुसार हादसे के समय परिसर में 23 कर्मचारी मौजूद थे। इनमें से 14 लोगों को जीवित बाहर निकाल लिया गया, जबकि 9 कर्मचारियों की मौत हो गई।
रविवार तड़के अंतिम लापता कर्मचारी का शव मिलने के बाद सभी लापता लोगों का पता चल गया और बचाव अभियान समाप्त कर दिया गया।

84 घंटे तक चला रेस्क्यू
हादसे के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), सेना, दमकल विभाग, पुलिस, पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम और अन्य एजेंसियों ने संयुक्त अभियान शुरू किया।
बचाव कार्य आसान नहीं था। इमारत का ढांचा अस्थिर था, ऊपर से कई टन कचरा और कंक्रीट का मलबा जमा था। भारी मशीनों, एक्सकेवेटर, गैस कटर और विशेष उपकरणों की मदद से चरणबद्ध तरीके से मलबा हटाया गया। सुरक्षा कारणों से कई बार अभियान धीमा करना पड़ा।

भारी बारिश बनी बड़ी वजह?
प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि लगातार हो रही बारिश के कारण कचरे का विशाल ढेर अस्थिर हो गया था। इसके बाद उसका बड़ा हिस्सा प्रशासनिक भवन की ओर खिसक गया। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही होगी।
जांच के आदेश
घटना के बाद संबंधित विभागों ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि प्रशासनिक भवन के समीप इतने बड़े कचरे के ढेर के बावजूद सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। साथ ही यह भी जांच होगी कि संभावित खतरे का पूर्व आकलन क्यों नहीं किया गया।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे ने शहरी ठोस कचरा प्रबंधन और वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संयंत्रों में नियमित भू-तकनीकी निरीक्षण, ढलानों की निगरानी और मानसून से पहले जोखिम मूल्यांकन अनिवार्य होना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
प्रमुख तथ्य
- घटना: 8 जुलाई 2026
- स्थान: मोशी, पिंपरी-चिंचवड़ (पुणे)
- परियोजना: PCMC वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट
- कारण (प्रारंभिक): कचरे का विशाल ढेर खिसकने से प्रशासनिक भवन ढहा
- भवन में मौजूद लोग: 23
- सुरक्षित निकाले गए: 14
- मृतक: 9
- रेस्क्यू अभियान: लगभग 84 घंटे
- जांच: प्रशासन द्वारा शुरू







