Uncategorizedराष्ट्रीय

MP Scholarship Scam: CBI का बड़ा खुलासा, ‘फर्जी MBA छात्रों’ के नाम पर ₹99.48 लाख की छात्रवृत्ति हड़पने का आरोप

नई दिल्ली/भोपाल, 14 जुलाई 2026 ।

मध्य प्रदेश में सरकारी छात्रवृत्ति योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने एक राष्ट्रीयकृत बैंक के पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक, एक निजी प्रबंधन कॉलेज के दो निदेशकों और अन्य आरोपियों सहित कुल सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि इन लोगों ने अस्तित्वहीन (Ghost) MBA छात्रों के नाम पर 118 फर्जी बैंक खाते खुलवाकर लगभग ₹99.48 लाख की छात्रवृत्ति राशि का गबन किया।

क्या है पूरा मामला?

CBI की प्राथमिकी (FIR) के अनुसार, कथित घोटाला जनवरी 2020 से अक्टूबर 2021 के बीच हुआ। जांच में आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसे छात्रों के नाम पर बैंक खाते खोले गए जो वास्तविक रूप से मौजूद ही नहीं थे। इन खातों में सरकारी छात्रवृत्ति की राशि जमा कराई गई और बाद में उसे निकाल लिया गया।

118 फर्जी बैंक खाते बने जांच का केंद्र

CBI के अनुसार, घोटाले को अंजाम देने के लिए 118 बैंक खाते खोले गए। आरोप है कि खाता खोलने की प्रक्रिया में फर्जी KYC दस्तावेज, गलत जानकारी और अन्य अनियमितताओं का इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि बैंकिंग प्रक्रिया के दौरान किस स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई।

किन लोगों पर कार्रवाई?

मामले में जिन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है, उनमें शामिल हैं:

  • राष्ट्रीयकृत बैंक का एक पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक।
  • निजी प्रबंधन कॉलेज के दो निदेशक।
  • बैंक और कॉलेज से जुड़े अन्य आरोपी।

CBI ने सभी आरोपियों पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच अभी जारी है और एजेंसी आगे दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड तथा डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।

छात्रवृत्ति व्यवस्था पर उठे सवाल

यह मामला केवल धन के दुरुपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी छात्रवृत्ति वितरण प्रणाली की निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करता है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो इसका अर्थ होगा कि पात्र छात्रों के लिए निर्धारित सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रवृत्ति योजनाओं में आधार-आधारित सत्यापन, बैंक खातों की नियमित जांच और संस्थानों के डेटा का डिजिटल ऑडिट ऐसे मामलों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

जांच अभी जारी

CBI ने स्पष्ट किया है कि यह प्रारंभिक जांच का चरण है। एजेंसी बैंक रिकॉर्ड, कॉलेज दस्तावेजों और अन्य वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद यदि पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो आरोपपत्र (Chargesheet) अदालत में दाखिल किया जाएगा। फिलहाल सभी आरोप जांच के दायरे में हैं और अंतिम दोष तय होना न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

Buland Chhattisgarh

Show More

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker