स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले की खुली पोल: 220 बिस्तरों का ‘हाथी’ बना जिला अस्पताल, पैर के ऑपरेशन के लिए तड़पता रहा वृद्ध, मजबूरी में लिया प्राइवेट का सहारा!
मनेन्द्रगढ़।जिले में ढोल-नगाड़ों के साथ शुरू किए गए 220 बिस्तरीय जिला अस्पताल की बदहाल व्यवस्था और संवेदनहीनता की एक और परत खुल गई है। खुद स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का यह हाल है कि गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों को इलाज के नाम पर सिर्फ टालमटोल और भटकाव मिल रहा है। ताजा मामले में पैर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक असहाय वृद्ध को समय पर ऑपरेशन और इलाज न मिलने के कारण दर-दर भटकना पड़ा। अंततः मजबूर परिजनों को उन्हें निजी अस्पताल ले जाना पड़ा।अस्पताल में सिर्फ ‘तारीख पर तारीख’, प्राइवेट में मजबूरी की मारपीड़ित परिजनों का दर्द छलका कि वे उम्मीद लेकर जिला अस्पताल पहुँचे थे कि शायद यहाँ उनके पिता को राहत मिलेगी। लेकिन सरकारी अस्पताल के चक्कर काट-काट कर जब वे थक गए और बुजुर्ग की हालत बिगड़ने लगी, तब उन्होंने प्राइवेट अस्पताल का रुख किया।”अगर सरकारी अस्पताल में समय पर ऑपरेशन हो जाता, तो हमें यूँ दर-दर की ठोकरें नहीं खानी पड़तीं। अब आयुष्मान कार्ड से आधा-अधूरा इलाज हो रहा है और बाकी के पैसों के लिए अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है।”— पीड़ित परिजन220 बिस्तर किस काम के? जब इलाज के लिए प्राइवेट ही आखिरी रास्ता!इस घटना ने 220 बिस्तरीय अस्पताल के बड़े-बड़े दावों की हवा निकाल दी है। स्थानीय जनता अब खुलकर सवाल उठा रही है:सफेद हाथी साबित हो रहा अस्पताल: जब 220 बिस्तरों का विशाल ढांचा होने के बाद भी मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों की ओर भागना पड़ रहा है, तो इस शो-पीस का क्या फायदा?स्वास्थ्य मंत्री के क्षेत्र में यह हाल: लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के अपने जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का यह आलम है, तो दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।जनता में भारी आक्रोश, व्यवस्था पर उठे गंभीर सवालइस पूरी घटना के बाद से मनेन्द्रगढ़ की जनता में अस्पताल प्रबंधन और लचर प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि कागजों पर तो योजनाएं और सुविधाएं बहुत बड़ी-बड़ी दिखती हैं, लेकिन धरातल पर मरीज आज भी बिना इलाज के तड़पने को मजबूर हैं।







