PoK में बढ़ते विरोध पर भारत का पाकिस्तान को कड़ा संदेश, कहा—’दशकों के शोषण का नतीजा है जनता का गुस्सा’

15 जुलाई 2026
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच भारत ने पाकिस्तान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि क्षेत्र में जारी प्रदर्शन वहां के लोगों के “दशकों से चले आ रहे व्यवस्थित शोषण, मौलिक अधिकारों से वंचित रखने और प्रशासनिक विफलताओं” का सीधा परिणाम हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को इन घटनाओं के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील भी की।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के लोगों की वैध चिंताओं और मांगों का समाधान करने के बजाय पाकिस्तान का प्रशासन लंबे समय से दमनकारी रवैया अपनाता रहा है। भारत का कहना है कि वर्तमान विरोध प्रदर्शन किसी बाहरी कारण से नहीं, बल्कि वर्षों से चले आ रहे असंतोष का परिणाम हैं।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्या अपील की?
भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान को “उसके गंभीर दुरुपयोगों और कृत्यों के लिए पूरी तरह जवाबदेह” ठहराना चाहिए। भारत का कहना है कि PoK के लोगों के अधिकारों, सम्मान और न्याय से जुड़े मुद्दों पर वैश्विक स्तर पर गंभीर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

PoK में विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?
हाल के दिनों में पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत ने कहा कि मौजूदा स्थिति पाकिस्तान की नीतियों और लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक विफलताओं का परिणाम है।

भारत ने दोहराया अपना आधिकारिक रुख
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, जिसमें पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला क्षेत्र भी शामिल है, भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। साथ ही भारत ने कहा कि पाकिस्तान को वहां के लोगों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए और उनकी वैध चिंताओं का समाधान करना चाहिए।
निष्कर्ष
PoK में जारी विरोध प्रदर्शनों पर भारत ने स्पष्ट किया है कि वहां का जनाक्रोश दशकों से चले आ रहे शोषण, मौलिक अधिकारों से वंचित रखने और प्रशासनिक विफलताओं का परिणाम है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की अपील करते हुए क्षेत्र में लोगों के अधिकारों और न्याय सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।







