महा-लापरवाही या भ्रष्टाचार का खेल? हरदीडीह एनिकट मामले में घिरे ‘टोप्पो’, मुख्यमंत्री से त्वरित न्याय की मांग

रायपुर/छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सार्वजनिक परियोजनाओं की निगरानी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हरदीडीह एनिकट से जुड़ा मामला इन दिनों सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वायरल हो रहे आरोपों में जल संसाधन विभाग के एक अधिकारी, जिन्हें ‘टोप्पो’ के नाम से संबोधित किया जा रहा है, की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। साथ ही विभाग के भीतर कथित भ्रष्टाचार, चाटुकारिता और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और संबंधित विभाग की ओर से भी इस संबंध में कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। इसके बावजूद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है और विपक्ष के साथ-साथ आम नागरिक भी इसकी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
चार घंटे पहले सूचना मिलने का दावा, फिर भी नहीं खुले अधिकांश गेट

आरोपों के अनुसार, हरदीडीह एनिकट के गेट खोलने के संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों को लगभग चार घंटे पहले सूचना दे दी गई थी। इसके बावजूद समय रहते आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई।बताया जा रहा है कि एनिकट में कुल 40 गेट मौजूद हैं, लेकिन कथित रूप से केवल 2 गेट ही खोले गए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि शेष 38 गेट क्यों बंद रहे? यदि समय पर सभी गेट खोले जाते तो क्या संभावित जोखिम को टाला जा सकता था? यह प्रश्न अब स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
प्रशासनिक लापरवाही या किसी बड़े खेल का हिस्सा?
जनता का आरोप है कि यदि सूचना पहले से उपलब्ध थी तो आवश्यक कार्रवाई में देरी क्यों हुई? क्या यह केवल विभागीय लापरवाही थी या इसके पीछे कोई बड़ा खेल था? कुछ लोगों द्वारा यह आशंका भी जताई जा रही है कि इसके पीछे विभागीय मंत्री (CM) को बदनाम करने की साजिश भी हो सकती है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और इसकी सत्यता की जांच होना आवश्यक है।
मामले को लेकर नागरिकों और विभिन्न संगठनों ने मांग की है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही, अनियमितता या जानबूझकर की गई चूक हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सके। साथ ही, यदि किसी व्यक्ति या मंत्री की छवि खराब करने के उद्देश्य से गलत या भ्रामक जानकारी फैलाई गई है, तो उस पहलू की भी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए।