छत्तीसगढ़

खामोश हुई पंडवानी की सबसे बुलंद आवाज़… पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन :

दुनिया को अलविदा कह गईं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का सबसे बड़ा चेहरा ,पंडवानी सम्राज्ञी तीजन बाई –

भारतीय लोककला जगत के लिए 5 जुलाई 2026 की सुबह एक बेहद दुखद खबर लेकर आई। पंडवानी गायन को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने वाली पद्म विभूषण सम्मानित लोक कलाकार तीजन बाई का लंबी बीमारी के बाद रायपुर के AIIMS में निधन हो गया। उन्होंने तड़के करीब 3:15 बजे अंतिम सांस ली। वे पिछले कई सप्ताह से अस्पताल में भर्ती थीं और उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश के कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

AIIMS में ली अंतिम सांस

परिजनों और अस्पताल प्रशासन के अनुसार तीजन बाई को 27 मई से रायपुर AIIMS में भर्ती कराया गया था। लंबे समय से वे गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। इलाज के दौरान रविवार तड़के उनकी हालत बिगड़ी और उन्होंने अंतिम सांस ली।

कौन थीं तीजन बाई?

24 अप्रैल 1956 को छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी तीजन बाई ने बचपन से ही महाभारत की कथाओं को गाने और सुनाने की कला सीख ली थी। मात्र 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली सार्वजनिक प्रस्तुति दी। उस समय महिलाओं का पंडवानी की कपालिक शैली में मंच पर प्रस्तुति देना लगभग असंभव माना जाता था, लेकिन उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ते हुए इतिहास रच दिया।

पंडवानी को दिलाई वैश्विक पहचान

तीजन बाई ने महाभारत की कथाओं को अपनी दमदार आवाज, अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली से जीवंत बनाया। उन्होंने भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, जापान, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोककला को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई।

मिले थे कई बड़े सम्मान

भारतीय लोककला में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया—

  • पद्मश्री (1988)
  • संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995)
  • पद्म भूषण (2003)
  • पद्म विभूषण (2019)

वे छत्तीसगढ़ की उन चुनिंदा हस्तियों में शामिल थीं जिन्होंने प्रदेश का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया।

प्रधानमंत्री समेत कई नेताओं ने जताया शोक

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपनी कला से छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाई और उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री सहित कई नेताओं, कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब

उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहां बड़ी संख्या में कलाकार, प्रशंसक और आम लोग पहुंचे। अंतिम संस्कार के दौरान लोगों ने “चोला माटी के हे राम” गाकर उन्हें भावभीनी विदाई दी। पूरे प्रदेश में शोक का माहौल देखने को मिला।

तीजन बाई का निधन केवल एक महान लोक कलाकार की विदाई नहीं, बल्कि भारतीय लोकसंस्कृति के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत है। उनकी आवाज़ भले ही हमेशा के लिए शांत हो गई हो, लेकिन पंडवानी की हर प्रस्तुति, महाभारत की हर कथा और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत में उनका नाम सदैव अमर रहेगा। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

Buland Chhattisgarh

Show More

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker