तालाब निर्माण में कथित अनियमितताओं पर फूटा जनाक्रोश: पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने वन विभाग के खिलाफ खोला मोर्चा

पीसीसीएफ रायपुर से फोन पर की चर्चा, पूछा— “आखिर किस नियम के तहत जुलाई के भारी मानसून में कराए गए तालाब निर्माण?”
बैकुंठपुर/सोनहत। कोरिया वन मंडल में तालाब निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं, भारी मशीनों के उपयोग, फर्जी मास्टर रोल तथा पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हुए तालाबों को लेकर विवाद अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तेज हो गया है। लगातार प्रकाशित समाचारों और कोरिया जन सहयोग समिति द्वारा डीएफओ से की गई शिकायतों के बाद अब भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो भी खुलकर मैदान में उतर आए हैं।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक रायपुर से दूरभाष पर चर्चा की। उन्होंने जल संरक्षण योजनाओं के तहत कराए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों के पालन तथा सरकारी राशि के उपयोग पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की।
सोशल मीडिया के माध्यम से उठाए तीखे सवाल
पूर्व विधायक ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच पर विभिन्न समाचार पत्रों की कतरनों को साझा करते हुए वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि यदि 15 जून के बाद वर्षाकाल में मिट्टी संबंधी निर्माण कार्यों पर रोक रहती है, तो जुलाई माह में तालाब निर्माण किस नियम और किस तकनीकी स्वीकृति के आधार पर कराया गया।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि पहली ही बारिश में तालाब क्षतिग्रस्त हो गए, तो निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और तकनीकी परीक्षण पर भी गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
जुलाई में निर्माण कार्यों को लेकर उठे तीन बड़े सवाल
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने अपने बयान में तीन प्रमुख बिंदुओं पर सवाल उठाए—
● मानसून अवधि में निर्माण कार्य: उनका कहना है कि वर्षा ऋतु में मिट्टी संबंधी कार्यों पर तकनीकी प्रतिबंध रहता है, क्योंकि इस दौरान उचित समेकन नहीं हो पाता और संरचनाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
● बजट खर्च करने की जल्दबाजी: उन्होंने पूछा कि जब क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही थी, तब तालाब निर्माण कराने की आवश्यकता क्या थी। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं यह केवल बजट व्यय करने की जल्दबाजी तो नहीं थी।
● स्थानीय मजदूरों की अनदेखी: पूर्व विधायक का आरोप है कि कई स्थानों पर सूचना पटल नहीं लगाए गए तथा स्थानीय मजदूरों को रोजगार देने के बजाय जेसीबी और ट्रैक्टर जैसी मशीनों से कार्य कराया गया। उनका कहना है कि यदि ऐसा हुआ है तो इसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
जांच नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कहा कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रभावित ग्रामीणों, युवाओं और स्थानीय लोगों के साथ व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकारी धन के दुरुपयोग और जनहित की योजनाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी।
पहले चंदन चोरी, अब तालाब निर्माण पर सवाल
गौरतलब है कि हाल के दिनों में कोरिया वन मंडल लगातार विभिन्न मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। पहले सोनहत शासकीय नर्सरी से चंदन के पेड़ों की चोरी का मामला सामने आया था, वहीं अब तालाब निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कोरिया जन सहयोग समिति द्वारा डीएफओ के नाम शिकायत किए जाने तथा अब पूर्व विधायक गुलाब कमरो के हस्तक्षेप के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वन विभाग और शासन-प्रशासन इन आरोपों की जांच को लेकर क्या कदम उठाते हैं।






