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CBSE की तीन-भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, फिलहाल रोक से इनकार; कक्षा 9 में 1 जुलाई से लागू है नया नियम

15 जुलाई 2026

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की तीन-भाषा नीति (Three-Language Policy) को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि किसी नई भाषा को सीखना अपने आप में हानिकारक नहीं है और मामले की विस्तृत सुनवाई बाद में की जाएगी।

क्या है मामला?

CBSE ने 15 मई 2026 को जारी अपने सर्कुलर के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप कक्षा 9 से तीन-भाषा व्यवस्था लागू करने की घोषणा की थी। यह व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से प्रभावी है।

नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी। यदि कोई छात्र विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है, तो वह निर्धारित नियमों के अनुसार अतिरिक्त भाषा के रूप में उसका चयन कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नीति पर तत्काल रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि “नई भाषा सीखना कभी व्यर्थ नहीं जाता।” अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाओं में उठाए गए सभी कानूनी और व्यावहारिक मुद्दों पर बाद में विस्तार से सुनवाई की जाएगी।

CBSE ने अदालत में क्या बताया?

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में CBSE ने कहा कि:

  • उसके करीब 47.3% संबद्ध विद्यालय पहले से ही नई भाषा व्यवस्था के अनुरूप हैं।
  • 99.19% स्कूलों में कम से कम एक भारतीय भाषा पढ़ाने के लिए शिक्षक उपलब्ध हैं।
  • बोर्ड का कहना है कि नीति को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।

शिक्षकों को लेकर अदालत की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि तीन-भाषा नीति के अनुपालन को लेकर किसी शिक्षक के खिलाफ अनुचित दंडात्मक कार्रवाई की जाती है, तो अदालत आवश्यक होने पर हस्तक्षेप करेगी।

आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत देने से इनकार किया है। अब मामले की अगली सुनवाई में याचिकाओं में उठाए गए संवैधानिक और प्रशासनिक मुद्दों पर विस्तार से विचार किया जाएगा। तब तक CBSE की तीन-भाषा नीति लागू रहेगी।

निष्कर्ष

CBSE की तीन-भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा तत्काल रोक से इनकार किए जाने के बाद फिलहाल यह व्यवस्था प्रभावी बनी हुई है। अब इस मामले में अंतिम निर्णय विस्तृत सुनवाई के बाद आएगा। शिक्षा जगत, स्कूलों, अभिभावकों और छात्रों की नजर अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर रहेगी।

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