छत्तीसगढ़ विधानसभा मानसून सत्र 2026: तीजन बाई को श्रद्धांजलि के साथ हुई शुरुआत, पहले ही दिन हंगामे की भेंट चढ़ी कार्यवाही

रायपुर | 14 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र सोमवार को पंडवानी की विश्वविख्यात गायिका और पद्म विभूषण सम्मानित डॉ. तीजन बाई को श्रद्धांजलि के साथ शुरू हुआ। सदन की शुरुआत शोक प्रस्ताव से हुई, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित सभी दलों के नेताओं ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। सदन ने उनके सम्मान में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।
हालांकि शोक प्रस्ताव के बाद सदन का माहौल जल्द ही राजनीतिक टकराव में बदल गया। विपक्ष ने अयोध्या राम मंदिर से जुड़े चंदा विवाद सहित कई मुद्दों पर चर्चा की मांग करते हुए स्थगन प्रस्ताव रखा। विधानसभा अध्यक्ष ने यह कहते हुए प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया कि मामला राज्य के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई और अंततः दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी।

तीजन बाई को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश की लोक कला परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी की कपालिक शैली को वैश्विक पहचान दिलाई और अपनी कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के अनेक देशों तक पहुंचाया।
मुख्यमंत्री ने उनके संघर्षपूर्ण जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस दौर में महिलाओं की पंडवानी में भागीदारी बहुत कम थी, उस समय उन्होंने सामाजिक बाधाओं को तोड़कर अपनी अलग पहचान बनाई और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनीं।
नेता प्रतिपक्ष ने उठाई यह मांग
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने तीजन बाई को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बताते हुए कहा कि उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि लोक कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों के लिए डॉ. तीजन बाई के नाम पर राज्य स्तरीय पुरस्कार शुरू किया जाए।
पहले दिन ही राजनीतिक टकराव
श्रद्धांजलि के बाद सदन की सामान्य कार्यवाही शुरू हुई, लेकिन विपक्ष ने राम मंदिर चंदा विवाद पर चर्चा की मांग करते हुए स्थगन प्रस्ताव पेश किया। विधानसभा अध्यक्ष ने इसे नियमों के अनुरूप नहीं माना। इसके बाद विपक्षी विधायक वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अध्यक्ष ने पहले कुछ मिनट के लिए सदन स्थगित किया। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी हंगामा जारी रहा। कांग्रेस विधायकों ने पोस्टर दिखाते हुए चर्चा की मांग दोहराई, जिसके बाद दिनभर की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
आगामी दिनों में इन मुद्दों पर रहेगी नजर
मानसून सत्र के दौरान सरकार कई विधायी और वित्तीय कार्य पूरे करने की तैयारी में है। वहीं विपक्ष कानून-व्यवस्था, किसानों, रोजगार, बारिश से जुड़े नुकसान और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। ऐसे में आगामी बैठकें राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह सत्र?
यह मानसून सत्र राज्य सरकार के लिए इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें विभिन्न विभागों के कामकाज की समीक्षा, सरकारी योजनाओं पर चर्चा और विपक्ष के सवालों का सामना करना होगा। दूसरी ओर, विपक्ष इसे सरकार की जवाबदेही तय करने का अवसर मान रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पहले ही दिन हुए घटनाक्रम से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में सदन के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।







