रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासन में इन दिनों एक सवाल तेजी से तैर रहा है – क्या मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पास मौजूद दो सबसे अहम विभाग ही उनकी सबसे बड़ी परेशानी बनते जा रहे हैं?
जनसंपर्क विभाग और जल संसाधन विभाग – दोनों का नियंत्रण सीधे मुख्यमंत्री के पास है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि यही दोनों विभाग लगातार सरकार की छवि को नुकसान पहुँचा रहे हैं।
जनसंपर्क विभाग: भरोसे का प्रयोग, लेकिन नतीजा उल्टा
मुख्यमंत्री साय ने जशपुर कलेक्टर रह चुके डॉ. रवि मित्तल पर भरोसा जताते हुए उन्हें जनसंपर्क आयुक्त (CPR) जैसे संवेदनशील पद पर बैठाया था। उम्मीद थी कि वे सरकार और मीडिया के बीच सेतु बनेंगे, सरकार की उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से सामने रखेंगे और मुख्यमंत्री की छवि को मज़बूती देंगे।
लेकिन हकीकत इससे ठीक उलट निकलती दिख रही है।
डॉ. रवि मित्तल के आने के बाद से जनसंपर्क विभाग का माहौल लगातार बिगड़ता गया। मीडिया मैनेजमेंट, जो इस विभाग की रीढ़ माना जाता है, पूरी तरह फेल बताया जा रहा है।
प्रशासनिक गलियारों में अब उन्हें व्यंग्य में “बच्चा CPR” कहा जाने लगा है, जो यह संकेत देता है कि विभाग के भीतर भी उनकी कार्यशैली को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
मीडिया से टकराव, पक्षपात के आरोप और बढ़ती नाराज़गी
जनसंपर्क विभाग का काम मीडिया को साधना होता है, न कि उसे नाराज़ करना। लेकिन मौजूदा हालात में मीडिया का एक बड़ा वर्ग खुलकर असंतुष्ट है।
हालाँकि, डर और दबाव के चलते बहुत कम लोग सामने आ रहे हैं।
आरोप सीधे हैं—
मनमाने फैसले
पक्षपातपूर्ण रवैया
चुने हुए ‘चहेतों’ को ही विज्ञापन
असहमत पत्रकारों और संस्थानों की अनदेखी
नतीजा यह कि सरकार की सकारात्मक खबरें भी सही ढंग से ज़मीन तक नहीं पहुँच पा रहीं, और नकारात्मक घटनाएँ बेकाबू होकर वायरल हो रही हैं।





