सावन मास में हरा रंग बहुत खास माना जाता है, खासकर महिलाओं द्वारा हरे वस्त्र, चूड़ियाँ, मेंहदी और बिंदी पहनना परंपरा बन चुका है। इसके पीछे धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक तीनों दृष्टियों से गहरा कारण है।
Saawan Special : धार्मिक कारण:

- शिव और पार्वती की कृपा:
- हरा रंग माता पार्वती को अत्यंत प्रिय है। सावन में माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर व्रत और तप किया था।
- इसलिए महिलाएं हरे वस्त्र पहनकर सौभाग्य, पति की लंबी उम्र और पारिवारिक सुख-शांति की कामना करती हैं।
- हरियाली तीज और व्रत:
- सावन में आने वाले हरियाली तीज, सोमवार व्रत, मंगला गौरी व्रत आदि में हरे रंग का विशेष महत्व है क्योंकि ये सभी विवाहित स्त्रियों के सौभाग्य से जुड़े होते हैं।
Saawan Special : प्राकृतिक कारण:

- हरियाली का प्रतीक:
- सावन वर्षा का महीना है, जब चारों ओर हरियाली छा जाती है। हरा रंग इसी प्राकृतिक सौंदर्य और जीवन की ऊर्जा का प्रतीक है।
- शांति और ताजगी:
- हरा रंग मन को शांत, तन को ठंडक देने वाला और आंखों को सुकून पहुंचाने वाला रंग माना जाता है, जो मानसून के मौसम में मानसिक शांति देता है।
Saawan Special : सांस्कृतिक कारण:

- श्रृंगार का हिस्सा:
- भारत में विशेषकर उत्तर भारत में हरा रंग स्त्री के सौंदर्य और श्रृंगार का प्रतीक है। मेंहदी, चूड़ियाँ, बिंदी — ये सभी हरे रंग में पहनना परंपरा बन चुकी है।
- नवजीवन और समृद्धि:
- हरा रंग विकास, उन्नति और नवीन आरंभ का प्रतीक है। इसलिए इसे पहनना शुभ और मंगलकारी माना जाता है।







