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Vaibhav laxmi vrat … ना करे व्रत के दौरान ये गलतिया ..

वैभव लक्ष्मी व्रत एक हिंदू धर्म का व्रत है जो मां लक्ष्मी की पूजा के माध्यम से वैभव, समृद्धि, सफलता, और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए किया जाता है। यह व्रत अमावस्या के दिन या पूर्णिमा के दिन शुरू किया जाता है।

इस व्रत में, पूजा के लिए लक्ष्मी माता के मंत्र और श्लोकों का जाप किया जाता है और उनकी विधि अनुसार पूजा की जाती है। वैभव लक्ष्मी व्रत के दौरान लक्ष्मी माता की अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिसमें श्री यन्त्र का भी प्रयोग किया जाता है।

इस व्रत का महत्व हिंदू धर्म में बहुत ऊँचा है और इसे करने से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। इस व्रत के दौरान व्यक्ति को श्रद्धा और समर्पण के साथ पूजा करना चाहिए और ध्यान रखना चाहिए कि यह व्रत निरंतर चार हफ्ते तक रखा जाना चाहिए।

Vaibhav laxmi vrat … व्रत सामग्री

वैभव लक्ष्मी व्रत की सामग्री में निम्नलिखित चीजें शामिल होती हैं:

  1. लक्ष्मी मूर्ति: वैभव लक्ष्मी व्रत के दौरान लक्ष्मी मूर्ति की पूजा की जाती है। यह मूर्ति भंडारे में उपलब्ध होती है या फिर आप अपनी पसंद के अनुसार इसे खरीद सकते हैं।
  2. लक्ष्मी माता के मंत्र और श्लोक: वैभव लक्ष्मी व्रत के दौरान लक्ष्मी माता के मंत्र और श्लोक जपे जाते हैं। इन मंत्रों को अपने पंडित या धार्मिक गुरु से लेना चाहिए।
  3. दीपक: पूजा के दौरान दीपक जलाया जाता है।
  4. अगरबत्ती: वैभव लक्ष्मी व्रत के दौरान अगरबत्ती जलाई जाती है ताकि पूजा के दौरान सुगंध का वातावरण बना रहे।
  5. साफा और पोशाक: वैभव लक्ष्मी व्रत के दौरान व्यक्ति को साफ सुथरा रहना चाहिए और शुद्ध वस्त्र पहनना चाहिए।
  6. पूजन सामग्री: वैभव लक्ष्मी व्रत के दौरान पूजन सामग्री जैसे कि हल्दी, कुमकुम, गंगाजल, फूल, पत्ते और फल आदि की

Vaibhav laxmi vrat … व्रत के नियम

वैभव लक्ष्मी व्रत के नियम निम्नलिखित होते हैं:

  1. व्रत शुरू करने से पहले एक निर्धारित तारीख और समय चुनें।
  2. वैभव लक्ष्मी व्रत के दौरान उच्च स्थान तथा ध्यान को भंग नहीं करना चाहिए।
  3. व्रत के दौरान व्यक्ति को सत्विक खाने का ध्यान रखना चाहिए। भोजन में नैम्यचारी बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  4. वैभव लक्ष्मी व्रत के दौरान व्यक्ति को नियमित रूप से लक्ष्मी माता की पूजा करनी चाहिए।
  5. व्रत के दौरान व्यक्ति को बहुत समय तक निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए। उसे रोजाना पानी पीना चाहिए।
  6. व्रत के दौरान व्यक्ति को अपने शुभचिंतकों के साथ शांति और समझौते का अनुभव करना चाहिए।
  7. वैभव लक्ष्मी व्रत के दौरान नित्य आरती का पाठ करना चाहिए और उत्सवों में भाग लेना चाहिए।
  8. वैभव लक्ष्मी व्रत के दौरान व्यक्ति को दान-दान की भावना को अपनाना चाहिए।

Vaibhav laxmi vrat … व्रत कथा

एक समय की बात है, एक नागरिक था जो दिन रात मेहनत करता रहता था लेकिन उसे कभी धन की कमी नहीं थी। एक दिन उसने देखा कि एक वृद्ध महिला उसके द्वार पर खड़ी है और अनेक दिनों से रोटी के बिना रह रही है। उस नागरिक ने उस महिला की सेवा करना शुरू कर दी और उसे भोजन देने लगा।

एक दिन उस नागरिक के घर पर माँ लक्ष्मी आईं और उन्होंने उसका आभार व्यक्त करते हुए उससे कुछ मांगा। माँ लक्ष्मी ने उसे वैभव लक्ष्मी व्रत करने की सलाह दी और उसे बताया कि इस व्रत के द्वारा वह समस्याओं से मुक्त हो सकता है।

उस नागरिक ने माँ लक्ष्मी की सलाह मानते हुए वैभव लक्ष्मी व्रत किया और वह समस्याओं से मुक्त हुआ। वह अब खुश था और उसने अन्य लोगों को भी इस व्रत के बारे में बताया ताकि वे भी इसका लाभ उठा सकें।

Vaibhav laxmi vrat … आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥

उमा, रमा, ब्रम्हाणी,
तुम ही जग माता ।
सूर्य चद्रंमा ध्यावत,
नारद ऋषि गाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

दुर्गा रुप निरंजनि,
सुख-संपत्ति दाता ।
जो कोई तुमको ध्याता,
ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

तुम ही पाताल निवासनी,

तुम ही शुभदाता ।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशनी,
भव निधि की त्राता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

जिस घर तुम रहती हो,
ताँहि में हैं सद्‍गुण आता ।
सब सभंव हो जाता,
मन नहीं घबराता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

तुम बिन यज्ञ ना होता,
वस्त्र न कोई पाता ।
खान पान का वैभव,
सब तुमसे आता ॥

॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

शुभ गुण मंदिर सुंदर,
क्षीरोदधि जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन,
कोई नहीं पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

महालक्ष्मी जी की आरती,
जो कोई नर गाता ।
उँर आंनद समाता,
पाप उतर जाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥

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