“जशपुर में सख्ती, बिलासपुर में नरमी “सिद्दीकी पर FIR कब?”
छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कार्रवाई की “चुनिंदा नीति” पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री के गृह जिला जशपुर में APS राशि समय से पहले जारी करने पर तत्कालीन कार्यपालन अभियंता जमानिक के खिलाफ FIR दर्ज हो सकती है, तो फिर बिलासपुर संभाग के कोटा डिवीजन के दबेना एनीकट में उससे भी बड़े कथित गड़बड़ी के बावजूद तत्कालीन कार्यपालन अभियंता I.A. सिद्दीकी पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?
दबेना एनीकट निर्माण कार्य में सामने आए दस्तावेज बताते हैं कि काम अधूरा होने के बावजूद अंबिकापुर की “श्रीग कंस्ट्रक्शन” फर्म को APS (FDR) के तहत पूरी भुगतान राशि जारी कर दी गई। यह न सिर्फ नियमों की खुली अनदेखी है, बल्कि सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
डील, दबाव या मिलीभगत? सिद्दीकी पर उठे गंभीर सवाल”
भ्रष्टाचार की परतें यहीं नहीं रुकतीं। एक्सीलरेशन भुगतान में डीजल-पेट्रोल की कीमत ₹95 प्रति लीटर होने के बावजूद ₹150 से अधिक दिखाकर बिल पास किए गए। यह अंतर साफ तौर पर फर्जी बिलिंग और आर्थिक अनियमितता की ओर इशारा करता है।
“फाइल से फंड तक सेटिंग का खेल!”
सबसे बड़ा झटका तब लगता है जब भुगतान के आंकड़े सामने आते हैं—जहां लगभग ₹4 लाख का खर्च बनता था, वहां करीब ₹27 लाख जारी कर दिए गए। यह फर्क किसी मामूली चूक का नहीं, बल्कि संभावित मिलीभगत का संकेत देता है।
जांच में यह भी उजागर हुआ कि न तो नियमित निरीक्षण हुआ और न ही गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ लापरवाही थी या फिर पूरे सिस्टम में “सेटिंग” के जरिए नियमों को दरकिनार किया गया?
अब स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का साफ कहना है—अगर जशपुर में FIR हो सकती है, तो बिलासपुर में क्यों नहीं? क्या कार्रवाई भी अब क्षेत्र और प्रभाव देखकर तय होगी?
मामले ने तूल पकड़ लिया है और उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। क्योंकि अगर ऐसे मामलों में जवाबदेही तय नहीं हुई, तो “कागज़ी विकास” का यह खेल सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता को पूरी तरह खत्म कर देगा।







