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‘दागी’ अधिकारी को बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी!

रायपुर। छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग में प्रमुख अभियंता के पद पर नियुक्ति को लेकर महानदी परियोजना से जुड़े अधिकारी शंकर ठाकुर, मुख्य अभियंता, महानदी परियोजना, रायपुर पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। आरोपों के अनुसार, जब शंकर ठाकुर दंतेवाड़ा में कार्यपालन अभियंता के पद पर पदस्थ थे, तब उन्होंने तलख कंस्ट्रक्शन, अंबिकापुर के माध्यम से एनीकट निर्माण कार्य पेटी ठेकेदार अमित जायसवाल को सौंपा था।

“जनता का पैसा बर्बाद, सिस्टम फिर भी मेहरबान!”

बताया जा रहा है कि शंकर ठाकुर और पेटी ठेकेदार अमित जायसवाल के बीच मिलीभगत कर योजनाओं को केवल कागजों पर ही अनुमोदित कर लिया गया। निर्माण कार्य ड्राइंग और डिजाइन के अनुसार नहीं कराया गया तथा फाउंडेशन की गहराई भी निर्धारित मानकों से कम रखी गई। इसके चलते कुल कार्य का लगभग 25 प्रतिशत ही गुणवत्ता विहीन तरीके से पूरा किया गया।

“करोड़ों की बर्बादी पर पर्दा, प्रमोशन का रास्ता साफ?”

आरोप है कि इस लापरवाही और अनियमितता का परिणाम यह हुआ कि प्रथम बरसात में ही करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित एनीकट धराशायी हो गए और पूरी संरचना टुकड़ों में बिखर गई। इससे शासन को भारी आर्थिक नुकसान हुआ और करोड़ों रुपये के दुरुपयोग के साथ घोर भ्रष्टाचार होने की बात कही जा रही है। यह भी आरोप है कि ठेकेदार एवं शंकर ठाकुर द्वारा लगभग 75 प्रतिशत राशि का आपस में बंदरबांट किया गया था।

वर्तमान में स्थिति यह है कि कांग्रेस के सांसद प्रत्याशी (पूर्व आईएएस अधिकारी) के समधी श्री शंकर ठाकुर को कांग्रेस लॉबी के दबाव में प्रमुख अभियंता पद पर नियुक्त करने की सिफारिश चल रही है। इस प्रस्ताव को लेकर विभागीय स्तर पर और आम जनमानस में भी सवाल उठने लगे हैं।

मामले में यह चिंता जताई जा रही है कि जिन अधिकारी पर पहले से ही 4 करोड़ रुपये की योजनाओं (जैसे एनीकट) में भ्रष्टाचार कर उन्हें अस्तित्वहीन करने के आरोप हैं, उन्हें 5000 करोड़ रुपये के बजट वाली योजनाओं का मुखिया बनाना अत्यंत अनुचित और जोखिमपूर्ण हो सकता है। आरोपों में यह भी कहा गया है कि शंकर ठाकुर ने पेटी ठेकेदार अमित जायसवाल के साथ मिलकर कांग्रेस शासनकाल में जल संसाधन विभाग में भ्रष्टाचार का माहौल बनाया था।

इस पूरे प्रकरण को लेकर संबंधित विभाग से मांग की जा रही है कि ऐसे अधिकारी को प्रमुख अभियंता जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त न किया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए ।

इस प्रकार के दागी अधिकारियों की वजह से विभाग की छवि धूमिल होती है और इससे विभाग के मुखिया तथा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

Buland Chhattisgarh

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