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लाखों-करोड़ों खर्च कर जिसे पाया नहीं जा सकता, वह तप से मुमकिन : श्री विरागमुनि जी

रायपुर । दादाबाड़ी में बुधवार को 175 से ज्यादा तपस्वियों ने सिद्धि तप शुरू किया। गणाधीश पन्यास प्रवर श्री विनयकुशल मुनिजी गणि महाराजा आदि साधु साध्वी ठाना की पावन निश्रा में तपस्वियों ने प्रभु की पूजा-अर्चना की और तपस्या निर्विघ्न पूर्ण करने की प्रार्थना की एवं प्रभु के आशीर्वाद के साथ सिद्धि तप की शुरूआत की, तपस्वियों ने मंत्रोच्चार और विधिविधान के साथ प्रदक्षिणा की। दादाबाड़ी में संगीतमयी माहौल के साथ सारे अनुष्ठान संपन्न हुए और तपस्वियों ने सिद्धि तप की शुरूआत की। यह तप बुधवार, 31 जुलाई से प्रारंभ होकर 44 दिन यानी 12 सितंबर तक चलेगा और 13 सितंबर को तप पारणा होगी। तपस्या के बाद पारणे की व्यवस्था श्रीसंघ द्वारा किया जाएगा।

सिद्धि तप के शुरूआत के अवसर पर मुनिश्री ने प्रवचन के माध्यम से तप की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सिद्धि तप करने से एक उपवास से एक, दो उपवास से दस, तीन उपवास से 100, चौथे उपवास से एक हजार, पांचवें उपवास से 10 हजार, छटवें उपवास से एक लाख, सातवें उपवास से 10 लाख और आठवें उपवास की श्रृंखला पूरी करने से एक करोड़ उपवास का लाभ मिलता है। सभी उपवास पूरे करने पर एक करोड़ ग्यारह लाख ग्यारह हजार ग्यारह उपवास का लाभ तपस्वी को मिलता है।

दादाबाड़ी में आत्मस्पर्शी चातुर्मास 2024 के प्रवचन श्रृंखला में बुधवार को दीर्घ तपस्वी श्री विरागमुनि जी ने कहा कि यूएसए में एक आदमी ने अपनी उम्र कम करने के लिए लाखों करोड़ों डॉलर खर्च किया है। हर महीने की उसकी डाइट और वर्कआउट पर करोड़ों रुपए खर्च होते हैं और उसकी उम्र 52 साल होने के बावजूद भी 45 वर्ष लगती है। इतना खर्च करने के बाद जब उसे पता चला कि तप से भी बहुत असर पड़ सकता है तो उसने तप शुरू किया और आज परिणाम यह है कि मेडिकल की मशीनों में उसकी उम्र 18 की बताती है तो तप से क्या नहीं हो सकता जो इतने पैसे खर्च करने के बाद नहीं हो पाया। वह तप करने पर बिना कुछ खर्च करें प्राप्त हो गया।

क्या है सिद्धि तप

सिद्धि तप 44 दिनों का होता है और इसे जैन धर्म में महातप माना जाता है। तप की शुरूआत एक दिन के उपवास से होती है और अगले दिन व्यासना होता है। फिर दो दिन का उपवास और अगले दिन व्यासना होती है। फिर तीन दिन उपवास और व्यासना, उसके बाद चार दिन उपवास और व्यासना ऐसा करते हुए यह क्रम आठ दिनों के उपवास पर थमता है और अगले दिन पारणा किया जाता है। व्यासना के दौरान दिन में दो बार भोजन ग्रहण किया जाता है और उसके बाद सूर्यास्त तक केवल गर्म पानी पीने का नियम होता है।

आत्मस्पर्शी चातुर्मास समिति 2024 के प्रचार प्रसार संयोजक तरुण कोचर और निलेश गोलछा ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि दादाबाड़ी में प्रतिदिन सुबह 8.45 से 9.45 बजे मुनिश्री की प्रवचन श्रृंखला जारी है, आप सभी धर्म बंधुओं से निवेदन है कि जिनवाणी का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

Vanshika Pandey

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