गजब का देश है बॉस….सरकारी खजाने में सेंधमारी करने के तरीकों को इजाद करने का मंत्र…. प्रशासन में बैठे अधिकारी इतनी बखूबी निभाते हैं कि….आम जनों को अंदाजा ही नहीं लग पाता की….उनकी गाढ़ी कमाई से दिए जाने वाले…. टैक्स का दुरुपयोग इस तरह भी हो सकता है…. हम बात कर रहे हैं….बिलासपुर के कोटा ब्लॉक में… अरपा भैंसाझार के प्रोजेक्ट के अंतर्गत प्रस्तावित नहर के लिए…किए गए जमीन अधिग्रहण में… बांटे गए बंदरबाट मुआवजे की…. अरपा भैंसाझार प्रोजेक्ट का शिलान्यास पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने सन 2013 में किया था… जिसमें 102 गांवों को सिंचाई का लाभ मिलना था…किंतु आज 2025 तक उक्त परियोजना का कार्य तो पूरा हुआ नहीं….अपितु करोड़ों का मुआवजा घोटाला अवश्य हो गया… 370 किलोमीटर की नहर… अरपा भैंसाझार परियोजना में मुख्य नहर के साथ शाखा नहर से… 102 गांवों में लगभग 25000 हैकटेयर भूमि की सिंचाई होनी है… जो भविष्य में होना तय है… किंतु सवाल यह है की 2013 से 2025 तक भी… उक्त परियोजना अब तक पूर्ण नहीं हुई… तो होगी कब…? परियोजना तो पूरी हुई नहीं… किंतु मुआवजा के नाम करोड़ों का घोटाला अवश्य हो गया…जिसमें राजस्व अधिकारियों सहित जल संसाधन के अधिकारियों ने जमकर डुबकियां लगाई…उसमें से एक अधिकारी ही निलंबित हुआ…वहीं कुछ पर कार्यवाही करने का निर्देश मात्र जारी हुआ… जबकि बाकी अधिकारी आज भी मौज में हैं…इतना ही नहीं कुछ को तो बतौर इनाम पदोन्नति से नवाजा गया…2014-15 से पदस्थ आठ ऐसे राजस्व अनुविभागीय अधिकारी,
आर आई, पटवारी,तहसीलदार सहित सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने धारा11 19 का प्रकाशन किए बिना ही…मुआवजे के बंदरबांट में… सरकार के खजाने में जहां डाका डाला… वहीं अपने सात पुस्तों के लिए… चलअचल संपत्ति का जखीरा भी खड़ा कर लिया… जिसकी जांच भी होना चाहिए..ऐसी चर्चा आम है… जहां जमीन अधिग्रहण में धारा 11 19 की प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई… वहीं जमीन का रकबा भी बढ़ाकर घोटालेघपले की चर्चा है… खामोशी से चलने वाले मामले का खुलासा होने के बाद… तत्कालीन कलेक्टर सौरभ कुमार ने…इसकी जांच अवश्य की… किंतु वह जांच भी चुनिंदा खसरों तक ही सीमित रही… जिसमें एसडीएम से नीचले अधिकारीकर्मचारियों पर गाज गिर गई… जबकि तमाम एसडीएम को बख्श दिया गया… जो मुख्य रूप से दोषी थे… जिनमें तत्कालीन एसडीएम देवेंद्र पटेल, कीर्तिमान राठौर,देवेश ध्रुव, डी आर डहीरे, राजेंद्र गुप्ता नूतन कवर को बाकायदा पदोन्नति दे दिया गया… मात्र आनंद रूप तिवारी जो कभी आरटीओ में थे को… निलंबित कर यथास्थान रवानगी कर दी गई… अन्य अधिकारियों की बात करें तो तत्कालीन नायब तहसीलदार मोहर साय सिदार,तत्कालीन राजस्व निरीक्षक राहुल सिंह, तत्कालीन पटवारी दिलशाद अहमद,आर आई मुकेश साहू के अलावा जल संसाधन विभाग के तत्कालीन कार्यपालन अभियंता आईएस नायडू, अशोक तिवारी, तत्कालीन एसडीओ तखतपुर राजेंद्र प्रसाद मिश्रा, आर पी द्विवेदी, उप अभियंता तखतपुर आरके राजपूत को भी जिम्मेदार माना गया है… जिसमें राजस्व निरीक्षक मुकेश साहू को मात्र बर्खास्त किया गया… अब सवाल उठता है की अरपा भैंसाझार नहर परियोजना जमीन अधिग्रहण में 102 गांव के जमीन मुआवजे की राशि 391 करोड़ से अधिक की राशि में अधिकारियों ने करोड़ों जिम लिए….तो छत्तीसगढ़ की अन्य परियोजना में बाकी अधिकारी तो लालपीलेहरे_नीले तो हो ही गए होंगे… भ्रष्टाचार में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने वाली भाजपा सरकार… क्या जनता के समक्ष ऐसे अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही कर… प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को साकार करेगी या फिर तू मेरी खुजा… मैं तेरी….की तर्ज पर अपने 5 साल पूरा करेगी…







