छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में एक ऐसा महाघोटाला सामने आया है, जिसने शासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीन विवादित ठेकेदारों की तिकड़ी ने विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से नियम-कानूनों को रौंदते हुए करोड़ों रुपये की FDR (फिक्स्ड डिपॉज़िट रसीद) को कार्य पूर्ण होने से पहले ही तुड़वा लिया। इस पूरे प्रकरण को मुख्यमंत्री की छवि को बदनाम करने की सुनियोजित साज़िश के तौर पर देखा जा रहा है..
मेसर्स सुनील कुमार अग्रवाल, रायगढ़
श्रृंग कंस्ट्रक्शन, अंबिकापुर
मेसर्स ख़लत्कर कंस्ट्रक्शन इंफ्रा प्रा. लि., नागपुर
इन तीनों फर्मों के मालिकों ने राज्य के एक दर्जन से अधिक स्थानों पर चल रहे निर्माण कार्यों के पूर्ण होने से पहले ही जमा FDR (फिक्स्ड डिपॉज़िट रसीद) को नियमों को ताक पर रखकर तुड़वा लिया। यह पूरा खेल विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया, जिससे शासन को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
अंबिकापुर जिले की देवगढ़ व्यपवर्तन योजना
अंबिकापुर जिले की देवगढ़ व्यपवर्तन योजना में ठेकेदार सुनील कुमार अग्रवाल द्वारा 12 मार्च 2024 को 4 करोड़ 22 लाख 83 हजार 805 रुपए की राशि का FDR/TDR विभाग में जमा कराया गया था। नियम के अनुसार, FDR/TDR की राशि तब तक न तो निकाली जा सकती है, न बदली जा सकती है, और न ही उसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ की अनुमति होती है, जब तक संबंधित कार्य पूर्ण नहीं हो जाता। किंतु ठेकेदार सुनील कुमार अग्रवाल ने अधिकारियों से मिलीभगत कर 1 MAY 2024 को कर्नाटका बैंक के पुराने FDR/TDR खाते को बंद कर नया FDR/TDR जमा करने का निवेदन किया। इसके बाद कार्यपालन अभियंता, जल संसाधन विभाग क्रमांक 01 अंबिकापुर ने पुराने FDR/TDR को वापस कर नया FDR जमा करने की अनुमति दे दी।
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है:
क्या उक्त कार्य नियमों के अनुसार किया गया?
क्या कार्यपालन अभियंता को बिना कार्य पूर्ण हुए पहले जमा किए गए FDR को वापस लेने और नया FDR जमा करने का अधिकार था?
क्या कार्यपालन अभियंता ने इस प्रक्रिया में उच्च अधिकारियों की जानकारी ली या अनुमति ली?
यदि अनुमति नहीं ली गई, तो क्या उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही होगी?
क्या ठेकेदार सुनील कुमार अग्रवाल पर इस मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाएगा?
साथ ही चर्चा यह भी है कि आखिर ठेकेदार को पुराना FDR निकालकर नया FDR जमा कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी। कर्नाटका बैंक, रायगढ़ में बनाए गए पुराने खाते को बंद कर नया FDR किस आधार पर और क्यों बनाया गया?
जांच के दायरे में आने वाला सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि क्या सुनील कुमार अग्रवाल ने विभाग में पुराना FDR वास्तव में जमा कराया था या नहीं? या यह कोई षड्यंत्र था, या कुछ कार्य के एवज में अग्रिम बतौर मिले लगभग 6 करोड़ की राशि से बनाए गए नए एफडीआर को विभाग में जमाकर पुराने एफडीआर को निकालने का षड्यंत्र किया गया
इस घटना ने विभागीय प्रक्रियाओं, पारदर्शिता और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
रायगढ़ में निर्माणाधीन चपले एनीकट परियोजना
रायगढ़ में निर्माणाधीन चपले एनीकट परियोजना में भी ₹2 करोड़ से अधिक की FDR को कार्य पूर्ण होने से पहले ही निकाल लिया गया।
स्थानीय स्तर पर शिकायतों के बावजूद फाइलें दबाई जाती रहीं और भुगतान की राह साफ़ की जाती रही।
अंबिकापुर की श्रृंग कंस्ट्रक्शन और नागपुर की ख़लतकर कंस्ट्रक्शन इंफ्रा प्रा. लि.
अंबिकापुर की श्रृंग कंस्ट्रक्शन और नागपुर की ख़लतकर कंस्ट्रक्शन इंफ्रा प्रा. लि. ने तो भ्रष्टाचार की सारी हदें ही पार कर दीं।
दोनों फर्मों ने झूठे शपथ पत्र देकर अपने पास मौजूद अन्य निर्माण कार्यों (वर्क इन हैंड) की जानकारी जानबूझकर छिपाई। श्रृंग कंस्ट्रक्शन द्वारा बिलासपुर जिले के कोटा डिवीजन के अंतर्गत आने वाला दबेना एनीकट में भी कार्य पूर्ण होने से पहले ही FDR अधिकारियों की मिलीभगत से शासन को नुकसान पहुंचाते हुए रिलीज़ करवा लिया इसी प्रकार ख़लतकर कंस्ट्रक्शन द्वारा भी मुख्यमंत्री के गृह जिला जशपुर में भी FDR रिलीज़ करवा लिया इस प्रकार बिना कार्य पूर्ण हुए ही FDR रिलीज़ की अनुमति किसकी सहमति पर दी गई? दोषी अफसरों और ठेकेदारों पर शासन द्वारा कब कार्यवाही की जाएगी?
सूत्रों का दावा है कि यह पूरा खेल सीएम साय की छवि खराब करने और जल संसाधन विभाग को जानबूझकर विवादों में घसीटने की प्लानिंग का हिस्सा है ?








