
रायपुर । श्री संभवनाथ जैन मंदिर विवेकानंद नगर में जारी आत्मोल्लास चातुर्मास 2024 में मंगलवार को रायपुर के कुलदीपक तपस्वी मुनिश्री प्रियदर्शी विजयजी म.सा.का 50वां अवतरण दिवस भक्तिभाव से मनाया गया। दीक्षा के 25 वर्ष बाद पहली बार मुनिश्री प्रियदर्शी विजयजी म.सा. रायपुर आए हैं। इस विशेष अवसर पर मुनिश्री के अवतरण दिवस को समाज ने उत्सव के रूप में मनाया।
इस विशेष अवसर पर रंग बिरंगे अक्षत से 50 गवली बनाई गई। श्रावक-श्राविकाओं ने मुनिश्री को जयकारों के साथ 50 गवली के मध्य से मंच तक पहुंचाया। इस बीच मुनिश्री के 50 अंतिम कदम पर रजत मुद्रा से गुरु पूजन किया गया। “swag से संयम तक” थीम पर बाल्यावस्था से,स्कूल शिक्षा से लेकर दीक्षा एवं दीक्षा के पश्चात अनेक वर्षों के फोटो प्रदर्शित किए गए। सभी ने मुनिश्री को अक्षत से बधाया। अनेक महिला मंडलों द्वारा जन्मोत्सव पर संगीतमय प्रस्तुति दी गई।
परम पूज्य मुनिश्री तीर्थप्रेम विजयजी म.सा. ने मुनिश्री प्रियदर्शी विजयजी म.सा. की 50 पॉइंट पर उनकी विशेषताओं पर प्रकाश डाला। 50 में से पहले छब्बीस विशेषताएं अंग्रेजी के ए से जेड अक्षर तक और शेष चौबीस विशेषताएं 24 तीर्थंकरों पर बताते हुए व्याख्यान दिया।
संसार के सभी दुखों की जड़ जन्म है : मुनिश्री तीर्थप्रेम विजयजी
मुनिश्री तीर्थप्रेम विजयजी म.सा. ने कहा कि हर एक व्यक्ति के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटना अपना-अपना जन्म होती है। शास्त्रकार इसे दुर्घटना कहते हैं,यह जन्म नाम की घटना 14 राजलोक के अनंत अनंत जीवों के जीवन में होने वाली सबसे पहली दुर्घटना है। दुखों की लिस्ट में सबसे पहला दुख जन्म है। अगर जीव का जन्म ही ना हो तो उसके जीवन में आने वाली आदि, व्यादि, रोग, बुढ़ापा, संताप और मृत्यु आए ही नहीं। संसार के सभी दुखों की जड़ जन्म है।
मुनिश्री ने बताया कि किनका जन्म मनाने लायक है। उन्होंने कहा तीर्थंकरों का जन्म मानने लायक है क्योंकि समस्त सृष्टि के लिए कल्याणकारी है। किसी जीव के जन्म से संसार के अनंत जीव को आनंद प्राप्त हो जन्म उनका मनाना चाहिए। लाखों के जीवन में कल्याण का प्रवेश हो जन्म वह मनाना चाहिए। जन्म उसी का मानना चाहिए जिसका एक जन्म आगे आने वाले अनंत जन्मों पर पूर्ण विराम रखने का काम करें, ना की एक जन्म आने वाले जन्मों की श्रृंखला खड़ी करें। जिसके जन्म से संसार की वृद्धि नहीं संसार का क्षय हो,जो अपने जन्म मृत्यु के चक्करों को खत्म करने के लिए निकले हुए हैं, वास्तव में जन्म उनका मनाना चाहिए।







