दिवाली के ठीक 15 दिन बाद देव दीपावली मनाई जाती है

पौराणिक मान्यता है कि देव दीपावली के दिन देवता काशी की पवित्र भूमि पर उतरते हैं

देवता काशी की पवित्र भूमि पर उतरते हैं और दिवाली मनाते हैं

मुख्य रूप से देव दिवाली काशी में गंगा नदी के तट पर मनाई जाती है

इस दिन पवित्र नदी में स्नान का बहुत अधिक महत्व माना जाता है

काशी नगरी में देव दीपावली का अलग ही उल्लास देखने को मिलता है

हर ओर साज-सज्जा की जाती है और गंगा घाट पर हर ओर मिट्टी के दिए प्रज्वलित किए जाते हैं

इस दिन दीपक के प्रकाश, जप, दान व स्नान का विशेष महत्व रहता है

ऐसा करने से व्यक्ति पर लक्ष्मी नारायण की कृपा होती है

देव दीपावली यानी कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा नदी में स्नान करने के बाद 11 दीपों का दान करें

देव दीपावली के अवसर पर घर के पास के किसी मंदिर में जाकर अपने आराध्य की पूजा करें। मंदिर में अपने आराध्य को मंत्रोच्चार करते हुए दीप दिखाएं